निकम्माराम की चमचागिरी

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डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त,
कोरोनापुर नामक एक गाँव था। वहाँ के मुखिया थे सुशासन बाबू। वे सिर्फ नाम के थे, काम के नहीं। पिछले पाँच वर्षों से गाँव की हालत में रत्तीभर का विकास कार्य नहीं हुआ। अब उन्हें चिंता सताने लगी कि सिर पर खड़े चुनाव को जीतें कैसे? दिन-रात इसी चिंता में वे आधे होते चले गए। उनका एक करीबी चमचा था, जो गाँव भर में निकम्माराम के नाम से जाना जाता था। उससे सुशासन बाबू की दशा देखी नहीं गयी। ऐसा इसलिए नहीं कि वह मुखिया जी से बड़ा प्रेम करता था, वो तो उनके नाम पर अपने सारे गोरख धंधे चलाकर धड़ल्ले से नोट छापता था। अगर कहीं मुखिया जी हार गए तो नया मुखिया उसकी एक न चलने देगा। इसीलिए सुशासन बाबू जी का जीतना उसके लिए जरूरी हो चला था। उसने अपने अनुभव के सारे पैंतरे अपनाकर चुनाव जीतने की रणनीति बनायी।
अगले दिन वह सुशासन बाबू के घर पर जा टपका। उनकी उतरी सूरत देखकर समझ गया कि वे भावी हार को लेकर बड़े चिंतित हैं। उसने मुखिया जी को समझाया – आप चिंता क्यों करते हैं? मैं किस दिन के लिए हूँ। अब काम न आऊँगा तो कब काम आऊँगा? मैंने आपके जीतने के सारे इंतजाम कर दिए हैं। मैं अपने साथ चार साथियों को ले आया हूँ। वे हैं – व्हाट्सपधर, फेसबुकिया, इंस्टाराम और भजनखबरी। ये आज के चार सफलता मंत्र हैं। ये हमारे लिए दिन-रात ऐसी कमरतोड़ मेहनत करेंगे कि किसी की मजाल नहीं होगी आपको हराने की। यह सब सुन मुखिया जी की हिम्मत तो बढ़ी लेकिन मन के किसी कोने में दबे हार के भय का शंका निवारण करने के लिए पूछ डाला कि जब हमने कोई विकास कार्य किया ही नहीं तो ये चारों हमारी चुनावी नैया कैसे पार लगायेंगे? तब निकम्माराम ने कहा – मुखिया जी आप बड़े भोले हैं। आज का जमाना काम करने वाले को नहीं दिखावा करने वाले को जिताता है। जो दिखावा नहीं करता लोग उसकी एक नहीं सुनते। व्हाट्सपधर हमारे बारे में गाँव के सारे समूहों में अच्छे-अच्छे संदेश फॉरवर्ड करेगा। हमारे चेले चपाटे उन संदेशों की भूरि-भूरि प्रशंसा करेंगे। अगर कोई चू चपड़ करेगा उसको उसी समूह में ऐसे-ऐसे संदेशों से पटक-पटक कर मारेंगे कि वह अपने आप समूह छोड़ने पर बाध्य हो जाएगा या फिर हमारा गुणगान करने लगेगा। फेसबुकिया आपकी अच्छी-अच्छी तस्वीरें, वीडियो पोस्ट करेगा, जिसे चेले चपाटे इतना लाइक, शेयर करेंगे कि सबकी आँखें फटी की फटी रह जायेंगी। इंस्टाराम गाँव की तस्वीर बदलकर इसे शहर बना देगा। इन तीनों के अतिरिक्त जो हमारा सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है, वो है- भजनखबरी। ये हमारे लिए प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में इतना प्रचार करेगा कि हर जगह केवल आप ही आप छाये रहेंगे। विपक्षी दल की धज्जियाँ उड़ाकर उन्हें कहीं का न छोड़ेगा। केवल आपको जनता के सामने हाथ जोड़कर भलाई की मूरत बने रहना है। जनता आप पर उंगली न उठाए, इसकी जिम्मेदारी हमारी है। मुखिया जी सब कुछ समझ गए। अब उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। हर जगह रट्टे-रटाये भाषण में एक ही बात कहते – मैं आपका हूँ। मुझसे ईर्ष्या या क्रोध न करें। मैं सत्य के लिए काम करूँगा। सत्यमेव जयते कहूँगा। आप सभी खूब मेहनत करें, मैं आपकी मेहनत को नयी पहचान दिलाऊँगा। सभी चीज़ें सस्ती और आपका जीवन खुशहाल बनाऊँगा। हम सब मिलकर गाँव का विकास करेंगे। क्योंकि यह गाँव जितना मेरा है, उतना ही आपका है। इसलिए जो मेरा है वो तुम्हारा है और जो तुम्हारा है वो मेरा है। जहाँ तक विकास का सवाल है, तो वह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए विकास की चिंता छोड़ दीजिए और मुझको ही विकास मान लीजिए।
आखिरकार चुनाव संपन्न हुआ। अगले पाँच वर्षों के लिए मनलुभावन वायदे कर सत्ता हथिया ली गयी। ज्यादा नखरे करने वाले विपक्षी नेताओं को साम-दाम-दंड भेद से मिला लिया गया या फिर उन्हें गुमनाम कर दिया गया। गाँव में कुछ बदला या नहीं बदला यह ठीक-ठीक बता तो नहीं सकते, हाँ इतना अवश्य था कि जहाँ पहले कोई काम सस्ते में हो जाया करते थे अब वे चार गुना दामों में पूरे होने लगे। इस तरह गाँव दिन दुनी और रात चौगुनी विकास करने लगा।

post by tisha varshney

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