भारत के 20वें रंग महोत्सव (बीआरएम) के एक भाग के रूप में नाटकों, प्रदर्शनों और यूथ फोरम के साथ में परिवेशात्मक अभिनय और नुक्कड़ नाटक का मंचन

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नई दिल्ली(श्रीजीएक्सप्रेस)।
रुद्रा -: पीजीडीएवी कॉलेज के नुक्कड़ नाटक सोसाइटी के इस नाटक में भारतीय मीडिया के सलाह देने वाले दृष्टिकोण पर हमला करने की कोशिश की गई है, जहां, यह सब सूचना देने के लिए होना चाहिए। पत्रकारिता को किस नैतिकता पर काम करना चाहिए? आपके द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही अगली खबर की वैधता क्या है? इस बार स्वल्प राजतंत्र पर नही उसके पेहरेदारों पर उठेंगे!


केशव महाविद्यालय के एक थिएटर सोसायटी शेड्स द्वारा किया गया यह नाटक, जीवन के बारे में बात करता है, जहां प्रत्येक दिन इससे जुड़ा एक बहुत ही विशेष और अलग अर्थ रखता है। यह शिखा और गर्त (उतार-चढ़ाव) के माध्यम से चलता है और इसलिए, उत्कर्ष और अवसाद प्राकृतिक रूप से सुंदर हैं। लेकिन जीवन के प्रति हमारे भीतर की अस्पष्टता ने हमारे अंदर पीड़ा का एक दृष्टिकोण विकसित किया है जो हमारे दर्द को समाप्त करने का एक साधन है। क्या जीवन की सुंदरता, परिस्थितियों की मांग को झेलने का अकेला कारण नहीं हो सकता है? क्या ये स्थितियां हमेशा के लिए बनी रहेंगी? क्या ऐसी अस्थायी समस्याओं के लिए एक स्थायी समाधान सही विकल्प है?
भगिनी निवेदिता कॉलेज के नुक्कड़ नाटक टीम ने भी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के परिसर में अपने नाटक का प्रदर्शन किया।


माहौल या परिवेश के अनुकूल हो रहा अभिनय भारत रंग महोत्सव की एक विशेषता है और यह थिएटर के महोत्सव में विभिन्न रंगों को जोड़ता है। इन प्रदर्शनों में विभिन्न राज्यों के कम-ज्ञात (जो लोकप्रिय नहीं है) स्थानीय, पारंपरिक और लोक कलाओं का वर्णन होता है जो इसे राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ता है। नाटक के शुरू होने से पहले इन नाटकों का प्रदर्शन एनएसडी परिसर के ऑडिटोरियम में होता है। आज के सशक्त प्रदर्शनों में घूमर, सुआ नृत्य और फाग नृत्य का प्रदर्शन हुआ।

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