मैं चाहता हूँ कि आप खुलकर, सवाल पूछना है तो सवाल पूछिए : राहुल गांधी

नई दिल्ली(श्रीजी एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)। राहुल गांधी ने कहा कि मैं दो शब्द कह दूँ जस्ट शुरु करने के लिए। नॉर्मली राजनेता आकर लंबे भाषण करके चले जाते हैं, पर वो जो कम्यूनिकेशन होना चाहिए वो होता नहीं है, तो मैं चाहता हूँ कि आप खुलकर, सवाल पूछना है तो सवाल पूछिए, मगर अगर आप अपनी बात रखना चाहते हैं आपके दिल में कोई मुद्दा है जो आप हमें बताना चाहते हैं, उसके बारे में भी बताईए। एक छोटी सी बात है, टाइम ज्यादा नहीं है, तो अगर एक व्यक्ति कम समय लेगा और क्वेश्चन्स रिपीट नहीं करेगा, मुद्दे रिपीट नहीं करेगा तो और लोगों को चांस मिल सकता है, तो आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद की आपने मुझे यहाँ बुलाया। आपने अपना कीमती समय मुझे दिया, सुनने के लिए, मगर मैं एक हूँ आप कितने हो? तो आपने अपना कीमती समय मुझे दिया इसके लिए शुरुआत में धन्यवाद।

मध्य प्रदेश में, आने वाले समय में, सुनियोजित एमएसएमई की पॉलिसी और प्लास्टिक उद्योग के ऊपर एमएसएमई की पॉलिसी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में श्री राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान का अगर आप डेवलपमेंट देखें, पिछले 70 साल का देखना चाहते हैं, तो पिछले 70 साल का देखिए, उससे पीछे जाना चाहते हैं तो उससे पीछे जाइए। हिंदुस्तान तेजी से तब आगे बढ़ता है, जब मोनोपॉलीज तोड़ी जाती हैं। आप ग्रीन रेवोल्यूशन को देखें तो मोनोपॉली तोड़कर किसान को बीज, खाद और सपोर्ट दी गई। तभी ग्रीन रेवोल्यूशन सफल हुआ।

आप व्हाइट रेवोल्यूशन देखिए, उस समय जो कंपनीज गुजरात की महिलाओं को एक्सप्लोएट करती थी, उस मोनोपॉली को तोड़ा, हिंदुस्तान दूध उत्पादन में एक नंबर पर पहुँचा। टेलीकॉम रेवोल्यूशन देखें, तो सरकारी जो मोनोपॉली हुआ करती थीं, उसको राजीव गांधी जी ने, सैम पित्रोदा जी ने तोड़ने का काम किया। उसका इंस्ट्रूमेंट पीसीओ था, पब्लिक कॉल ऑफिस और आपने टेलीफोन रेवोल्यूशन, कंप्यूटर रेवोल्यूशन देखा। 1991 में लोग लिबराइजेशन की बात करते हैं, आप कांग्रेस की स्ट्रेटजी को देखें और  भाजपा की स्ट्रेटजी को देखें मेन फर्क ये है। कांग्रेस मोनोपॉली को तोड़ने का काम करती है लेकिन भाजपा मोनोपॉली बनाने का काम, मोनोपॉली को सपोर्ट करने का काम करती है। बेसिक फंटामेंटल डिफरेंस यह है।

आपने बहुत इंपोर्टेंट बात पकड़ी है। भाजपा की सरकार जब शुरुआत हुई थी, तो शुरुआत में नॉन परफॉर्मिंग एसेट दो लाख करोड़ रुपए थे, आज दस लाख करोड़ रुपए है, आपसे पूछना चाहता हूँ क्या ये नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स में स्मॉल एंड मीडियम बिजनेसेज का पैसा है? किसानों का पैसा है? मजदूरों का पैसा है? महिलाओं का पैसा है? ना। ये 15-20 हिंदुस्तान के सबसे बड़े बिजनेसमैन हैं। उनमें नीरव मोदी 35 हजार करोड़ रुपए उठाकर ले गया, मतलब 35 हजार करोड़ रुपए मनरेगा में लगाए थे कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार देने के लिए वो नीरव मोदी उठाकर ले गया उसी तरह राफेल डील में, नरेन्द्र मोदी जी ने 30 हजार करोड़ अनिल अंबानी की जेब में डाला। तो सबसे बड़े 15-20-30 बिजनेसेज हैं, जिन्होंने हिंदुस्तान के बैंकिग सिस्टम पर मोनोपॉली बना रखी है और उस मोनोपॉली को न आप तोड़ पाते हो, न किसान तोड़ पाता है, मगर अगर आप हिंदुस्तान की इकोनॉमी को बढ़ाना चाहते हो, स्पीड देना चाहते हो तो बैंकिग सिस्टम का एक्सेस स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस को देना ही पड़ेगा।

मैं आपको स्ट्राइकिंग एग्जामपल देता हूँ। तब श्री राहुल गांधी ने एक बिजनेसमैन से सवाल पूछा कि आप क्या करते हैं? (जवाब मिला प्लास्टिक प्रोसेसिंग का काम करते हैं), एक अन्य प्रश्न पर कि आप कितने लोगों को रोजगार देते हो, (जवाब मिला 250), आप 250 लोगों को रोजगार देते हैं। आपको क्या लगता है, 35 हजार करोड़ रुपए लेकर नीरव मोदी ने 250 लोगों को रोजगार दिया? क्या लगता है आपको? मुश्किल से उसने 250  लोगों को रोजगार दिया होगा। नहीं, वो तो पैसा दिया है, लेकिन रोजगार शायद 250, रूड्ड4 ड्ढद्ग 500। लेकिन नीरव मोदी के बजाय इनको 35 हजार करोड़ रुपए क्यों नहीं मिले या उससे भी बेहतर आप जैसे 50 हजार लोगों को 35 हजार करोड़ रुपए क्यों नहीं मिला।

कल मैं आर्टिकल पढ़ रहा था, बिलियनेयर लिस्ट; उसमें हिंदुस्तान के बिलियनेयर्स और बाकी दुनिया के बिलियनेयर्स का कंपेरिजन हो रहा था, बहुत स्ट्राइकिंग चीज दिखी मुझे। हिंदुस्तान में ्रश्चश्चह्म्श&द्बद्वड्डह्लद्गद्य4 कितने बिलियनेयर्स है? जवाब मिला, 100, चीन कितने बिलियनेयर्स बनाता है? हिंदुस्तान में 100 हैं, चीन हर सप्ताह में दो बनाता है, ठीक है और चीन के बिलियनेयर्स में से कितने प्रतिशत बिलियनेयर्स द्बठ्ठद्धद्गह्म्द्बह्ल करते हैं? दो प्रतिशत और चीन के बिलियनेयर्स कहाँ से आते हैं? हर एक उनका बिलियनेयर स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस से आता है। तो अगर हम स्मॉल एंड मीडियम बिजनेसज को बैंक का पैसा देंगे, हमारे सिस्टम को उनकी ओर ओरियंट करेंगे और ये मध्य प्रदेश में भी है; अगर हम उनको ओरियंट करेंगे तो ये रोजगार दे पाएंगे। ये जो 12 लाख करोड़ का एनपीए है इसमें आप एक सवाल निकालिए। ये जो बिजनेसेज हैं, जिन्होंने 12 लाख करोड़ रुपए लिए हैं, इन्होंने जॉब्स कितने दिए हैं हिंदुस्तान में? ये आप पता लगाइए और मेन मुद्दा हिंदुस्तान में रोजगार का है और उसको सिर्फ एक ग्रुप रिजोल्व कर सकता है।

लास्ट बात कहना चाहता हूँ, देखिए लोग कहते हैं, राहुल गांधी किसान की बात करता है, जहाँ भी जाता है किसान के कर्जे की बात करता है। मैं सिर्फ एक कारण से यह करता हूँ, वह है न्याय! अगर आप कहते हैं कि आप 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए 15 लोगों का माफ करोगे तो फिर आपको किसान का कर्जा माफ करना पड़ेगा। अगर आप मुझे कहते हो नहीं, हम 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए हिंदुस्तान के 15 सबसे अमीर लोगों का माफ नहीं करेंगे तो फिर ठीक है आप किसान का भी मत माफ करो। पर हमारा काम न्याय देने का है, अगर बैंक के दरवाजे उनके लिए खुले हैं तो फिर आपके लिए भी खुले होने चाहिए।

एक प्रश्न पर कि सोशल मीडिया पर जो भ्रामक दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, उसका सत्य सामने लाने के लिए पार्टी का क्या विजन है के उत्तर में श्री गांधी ने कहा कि देखिए मेरे बारे में बहुत सारी चीजें कही जाती है। मोदी जी के पास स्पेशल बजट है मेरे विरुद्ध सोशल मीडिया करवाने के लिए। गुजरात में 200 लोग बैठा रखे हैं, पता नहीं कहाँ-कहाँ शायद मध्य प्रदेश में भी 200 लोग बैठा रखे हैं, लेकिन सच्चाई तो आपको दिख रही है, आपको सच्चाई दिख रही है न?, आप मेरी बात सुनकर डिसाइड कीजिए क्या है, क्या नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया का जो नेचर है वो हैडलाइन्स और इमोशन पर चलता है और ये 21वीं सदी का प्रॉब्लम है। यूएस प्रेसीडेंट कहता है, भाई, दीवार बनाएंगे और इलेक्शन जीत जाता है, तो ये मोदी जी कहते हैं अच्छे दिन आएंगे और इलेक्शन जीत जाते हैं, तो वन लाइनर है, अच्छा, मुझे अच्छा नहीं लगता है, क्योंकि फ्रैंकली वन लाइनर देने से बात नहीं बनती है क्योंकि रियलिटी में पॉलिटिक्स काफी कॉम्प्लीकेटेड चीज होती है, उसके नीचे बहुत सारी चीजें होती है और वन लाइन में आप जस्टिस नहीं कर सकते हैं मगर हमें ह्वठ्ठद्घशह्म्ह्लह्वठ्ठड्डह्लद्गद्य4 फाइव डे क्रिकेट खेलने का मौका ही नहीं मिलता है। हमें वन डे क्रिकेड खेलना पड़ता है। लेकिन कोई सवाल पूछता है कि हमें ठीक से जवाब देना पड़ता है। वन डे भी छोड़ो टी-20 खेलना पड़ता है, लेकिन जब काम का समय आता है तो वन लाइन से बात नहीं बनती है, और फ्रैंकली वो कांग्रेस पार्टी की एडवांटेज है क्योंकि हमारा सिस्टम सुनने का सिस्टम है, हमारा सिस्टम एक-दूसरे की बात सुनने, समझने का सिस्टम है। उनका सिस्टम लाउडस्पीकर सिस्टम है, वो एंपलीफायर लगाते हैं, वॉल्यूम बढ़ाकर लगाते हैं, चला देते हैं लेकिन फ्रैंकली इसमें एक बात है, जब लोग डिस्टर्ब होते हैं, जैसे 2014 में लोग डिस्टर्ब हुए और कांग्रेस पार्टी का जो परफॉर्मेंस होना था, नहीं हुआ तो फिर लाउडस्पीकर काम करते हैं, मगर फिर थोड़ी देर बात जनता कहती है, भईया, लाउडस्पीकर बोल तो रहा है, मगर काम नहीं कर रहा, तो फिर हमें वापस काम में लगना पड़ता है।

तो माहौल खराब होता है, तो पहली चोट महिला को लगती है, तो कांग्रेस पार्टी के आने के बाद माहौल ठंडा होगा और 2004 में भी आपने ये नोटिस किया होगा कि मनमोहन सिंह जी की सरकार बनी, तो टेम्प्रेचर कूल हुआ तो यहाँ पर भी, मध्य प्रदेश में और नेशनल लेवल पर टेम्प्रेचर एकदम कूल होगा, ठंडा होगा। ये रही पहली बात।

दूसरी बात, कहना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन हिंदुस्तान के जो हमारे पुरुष हैं, उनका एटिट्यूड महिलाओं की ओर खराब है और मैं पुरुष हूँ, मुझे भी ये कहना अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन बहुत सारे ऐसे पुरुष हैं हिंदुस्तान में, जिनकी एप्रोच महिलाओं की ओर गलत है और ये राजनैतिक बात नहीं है, ये आन्तरिक दृष्टिकोण की बात है। इसको, मतलब, अंदर से ठीक करना पड़ेगा, ये बाहर से ठीक नहीं होगी और ये जिम्मेदारी हिंदुस्तान के पुरुषों की भी है, मेल्स की भी ये रेस्पोंसिबिलिटी है। हमारी हिस्ट्री में, हमारे ट्रेडिशन में, ऐसा कहीं नहीं लिखा गया है कि महिला को ठीक से ट्रीट नहीं करा जाए।

तीसरी बात, महिला को पावर स्ट्रक्चर में शामिल करना पड़ेगा। चाहे वो लोक सभा हो, चाहे राज्य सभा हो, अलग-अलग लेवल पर महिलाएं दिखाई देनी चाहिए। मैं चाहता हूँ कि आज से 5-6 साल बाद कांग्रेस पार्टी की 50त्न स्टेट्स में चीफ मिनिस्टर्स महिलाएं हो। फिर जो हमारे पुरुष हैं, उनको लगेगा भईया चीफ मिनिस्टर महिला है, थोड़ा ध्यान से काम करना पड़ेगा, ये फीलिंग भी आनी चाहिए। तो पावर में हर लेवल पर, पंचायती राज, एमएलए, एमपीस, बिजनेस सब जगह महिलाओं को थोड़ा स्पेशल मदद करने की जरुरत है और जीरो टोलरेंस।

देखिए, प्रधानमंत्री डायरेक्शन देते हैं। अगर उत्तर प्रदेश का एमएलए, भाजपा का एमएलए महिला का रेप करता है,  मुझे ये अच्छा नहीं लगा, मेरी पार्टी का आदमी है, मुझे अच्छा नहीं लगा, इसको बाहर निकालो या इसके खिलाफ कार्यवाही करो। तो इस बात को मैं पहले इतनी सिरियसली नहीं लेता था। मगर हिंदुस्तान में जनता प्रधानमंत्री की ओर देखती है अगर दलितों को पीटा जाता है, प्रधानमंत्री चुप रहता है, लोग सोचते हैं, हाँ, ऐसा करा जा सकता है। अगर महिला का बलात्कार होता है प्रधानमंत्री चुप रहते हैं लोग कहते हैं, हाँ ये काम करा जा सकता है तो जो चीफ मिनिस्टर है और जो प्राइम मिनिस्टर है उसको बड़ा क्लियर होना चाहिए कि ये एक्सेप्टेबल नहीं है और अगर आपने ये किया तो हम आपको उदाहरण स्वरुप ऐसा दण्ड देंगे कि बाकी लोगों को पता लगे कि ये काम नहीं किया जा सकता।

एक अन्य प्रश्न अतिथि विद्वान (त्रह्वद्गह्यह्ल रुद्गष्ह्लह्वह्म्द्गह्म्) व्यवस्था में शिक्षकों का शोषण हो रहा है इसे कांग्रेस पार्टी कैसे सुलझाएगी?, के उत्तर में श्री गाँधी ने कहा कि आप बच्चों को पढ़ाते हो, आप मध्य प्रदेश का भविष्य बनाते हो, मगर आपके अंदर क्या फीलिंग आती है, जब आप पढ़ाते हो और आप अपना फ्यूचर नहीं देख पाते हो? प्रश्नकर्ता से जवाब मिला, फीलिंग्स तो अब क्या कहें आपको, हमारा तो बस एक ही उद्देश्य होता है कि  हम अच्छे से अच्छा मार्गदर्शन उस बच्चे को दे सकें और वो अपने पैरों पर खड़ा होकर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सके और कुछ बच्चों की इच्छा होती है कि वो आज जिस जगह पर पढ़ रहा है वहीं पर वो कल खड़ा होकर के दूसरे विद्यार्थियों को पढाए, तो सर आगे चलकर हम भविष्य में कैसे उन बच्चों को मतलब मार्गदर्शन दें कि आप इस व्यवस्था से जुड़ो। सर मैं अपने आप को असुरक्षित महसूस करता हूँ, अपने परिवार को असुरक्षित महसूस करता हूँ कि कल क्या होगा? श्री गांधी ने कहा कि ये जो फीलिंग है न, इस फीलिंग को कांग्रेस पार्टी की सरकार मिटाने की कोशिश करेगी। अब आप मुझसे पूछोगे कि कांग्रेस पार्टी कैसे करेगी? डीटेल में आपको मध्य प्रदेश की साइड से कमल नाथ जी बता सकते हैं, मगर मैं ब्रोडली आपको बताता हूँ- कांग्रेस पार्टी का मेनिफेस्टो बन रहा है, वो एक्चुली कांग्रेस पार्टी का मेनिफेस्टो नहीं है, वो आप लोगों का मेनिफेस्टो है, ठीक है, वो मध्य प्रदेश को विजन देने जा रहा है। अब मध्य प्रदेश के पास फाइनेंसेज लिमिटेड हैं, अनलिमिटेड नहीं हैं, तो मेनिफेस्टो एक प्रकार से फाइनेंसेज को बांटने का काम करेगा। मैं आपके लिए अरेंज करूँगा कि जो हमारी मेनिफेस्टो की टीम है, आप एक डेलीगेशन के साथ जाकर डीटेल में ये बात उनको बता दे और हमारी पूरी कोशिश होगी कि जो आपने कहा, उसको हम मेनिफेस्टो में डालेंगे, लेकिन फ्रैंकली राजनेता का काम ह्यह्लड्डह्लद्बह्यह्लद्बष्ह्य बताना नहीं होता है, राजनेता का काम है समस्या सुलझाना, जब मैं आपके साथ स्टेज पर आकर या वहाँ आकर आपसे बात करुँगा और आप मुझे बताओगे कि मैं बच्चों की तो मदद करता हूँ मगर मुझे बहुत खराब लगता है कि मैं अपने बच्चों को ऐसे मदद नहीं कर पा रहा हूँ जो मैं दूसरे लोगों के बच्चों को करता हूँ तो जब मैं वो बात समझ जाऊँगा, वो मेरे दिमाग में घुस जाएगी फिर मैं अलग-अलग जगह से आपकी मदद कर पाऊँगा, आपको पता भी नहीं लगेगा कि मैंने वहाँ से कुछ कर दिया और आपकी मदद हो गई। तो ये प्रोसेस होता है। मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ कि आपने मुझे इतनी गहरी बात बताई।

एक अन्य प्रश्न पर कि जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी तो व्यापम घोटाले के मामले में सरकार क्या निर्णय लेगी और जो सच में आरोपी है उनको क्या सजा मिलेगी, के उत्तर में श्री गाँधी ने कहा कि बिल्कुल, न्याय होगा और न्याय मिलेगा मगर मैं आपको एक बात बता देता हूँ 1द्बठ्ठस्रद्बष्ह्लद्ब1द्गठ्ठद्गह्यह्य नहीं होगी। अगर किसी ने गलती की है, तो निष्पक्ष जांच होगी और दोषी व्यक्ति को सजा मिलेगी मगर 1द्बठ्ठस्रद्बष्ह्लद्ब1द्गठ्ठद्गह्यह्य, नफरत, गुस्से से कुछ नहीं होगा। अच्छा आप मच्छीमार हैं तो आपको एक इंट्रेस्टिंग कहानी बता सकता हूँ?, जवाब मिला, हाँ, बता सकते हैं। जो एक्चुली देश के लिए बहुत जरुरी कहानी है। एक मच्छीमार था, वो नाव में नदी को क्रॉस कर रहा था। दूसरे साइड से एक सूट पहना हुआ इंजीनियर आया। काफी साल पुरानी बात है, कहता है भईया, नदी पार करनी है, ले जाओगे, मच्छीमार कहता है, आईए, निकलें। इंजीनियर कहता है, भईया, आपने गणित पढ़ी है? मच्छीमार कहता है, भाई साहब, मैंने गणित तो नहीं पढ़ी। इंजीनियर कहता है, अरे भाई, तुम्हे क्या मालूम। पांच मिनट बाद इंजीनियर कहता है, भईया, एक बात बताओ, ष्ठश 4शह्व ह्यश्चद्गड्डद्म श्वठ्ठद्दद्यद्बह्यद्ध? मच्छीमार कहता है, भईया, मैं अंग्रेजी नहीं बोलता। पानी थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा था, तो पांच मिनट और हुए नाव में पानी आ गया। वो सूट-बूट वाला कहता है, तो गणित नहीं पढ़ी, इंग्लिश नहीं आती, हिस्ट्री तो पढ़ी होगी? मच्छीमार ने कहा, साहब, मैंने हिस्ट्री भी नहीं पढ़ी इस पर इंजीनियर कहता है, अरे भाई, तुम क्या कर सकते हो? तुम में क्या है? अरे पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी तुमने। पांच मिनट बाद सूट-बूट वाले व्यक्ति से मच्छीमार कहता है, भईया, नाव डूब रही है, तैरना आता है? तो मतलब हर एक व्यक्ति को कोई न कोई नॉलेज होती है और हिंदुस्तान का सबसे बड़ा प्रॉब्लम, जो इस देश को रोज रोकता है कि हम उस नॉलेज को रिस्पेक्ट नहीं करते, चाहे वो मच्छीमार हो, चाहे वो बड़ा बिजनेसमैन हो, चाहे वो युवा हो, सबके पास कोई न कोई समझ, चाहे वो चाय वाला हो, अब आपने बात पकड़ ली तो चौकीदार हो, तो सबके पास, सबके पास कोई न कोई नॉलेज होती है उसका रिस्पेक्ट होना चाहिए।

एक अन्य प्रश्न पर कि पिछले 15 सालों में जो रेत घोटाले हुए हैं मध्य प्रदेश में क्या कांग्रेस उनकी उच्च स्तरीय जाँच कराएगी, के उत्तर में श्री गाँधी ने कहा कि जो मैंने व्यापम पर बोला, देखिए, न्याय मिलेगा, विंडिक्टिवनेस, नफरत, गुस्सा वो नहीं होगा। अगर किसी ने कुछ गलत किया है, सजा मिलेगी। अगर कुछ गलत नहीं किया, नहीं मिलेगी लेकिन वो दूसरे तरीके से नहीं किया जाएगा। अगर आप कोई पॉइंट्स मेनिफेस्टो में डलवाना चाहते हैं, जो भी चीफ मिनिस्टर बनेगा वो मेरे साइड से मेनिफेस्टो उसकी अकाउंटेबिलिटी होगी। मैं और कुछ नहीं देखूँगा, मैं सीधा देखूँगा, भईया, ये हमने कमिटमेंट दी है मध्य प्रदेश को, आप कमिटमेंट पूरी कर रहे हो, हाँ या ना। अगर आपने उस मेनिफेस्टो में अपनी बात डाल दी तो वो कमिटमेंट आपकी पूरी हो जाएगी। मेनिफेस्टो में सब चीज नहीं डाली जा सकती ये तो आप समझते हैं क्योंकि वो लिमिटेड फंड है, लिमिटेड पैसा है, मगर, अगर आप उसको डाल देंगे तो हम आपको देंगे, कर देंगे।

जीएसटी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री गाँधी ने कहा कि मेरे पास कुछ समय पहले डेलीगेशन आया, व्यापारियों का डेलीगेशन आया और वो भाजपा के मंत्रियों से मिलकर आए थे। उन्होंने मुझे कहा कि देखिए, बाकी सब कुछ ठीक था, जो उन्होंने करना था, कहना था, कह दिया, मगर उन्होंने एक बात बोली, जिसने हमें बहुत चोट पहुँचाई, मैंने कहा, क्या बोला? उन्होंने बोला कि व्यापारी बेईमान होता है, चोर होता है। अब देखिए, लाखों व्यापारी ईमानदार होते हैं, एक व्यक्ति खराब जरुर हो सकता है, मगर आप पूरी कम्यूनिटी को एक आँख से नहीं देख सकते, तो पहली बात मैं आपको बोलना चाहता हूँ कि मेरे मुताबिक हिंदुस्तान के करोड़ों व्यापारी ईमानदार हैं। एक-दो व्यापारी बेईमान हैं, वो अलग बात है मगर एक-दो वकील भी बेईमान मिलेंगे, एक-दो पॉलिटीशियन भी बेईमान मिलेंगे, तो पहली बात ये।

दूसरी बात, जीएसटी, गब्बर सिंह टैक्स, अच्छा इसमें फ्रैंकली, मैं आपको बताऊँ, थोड़ी लंबी कहानी बताऊँ, एक हमारी गलती है, इसमें, एक हमारी गलती है, मैं आपको बताता हूँ, हम भाजपा के पास गए और हमने उनसे कहा, शुरुआत में कि देखिए, जीएसटी अच्छा आईडिया है हमारा आईडिया है, मगर सिंपल जीएसटी होनी चाहिए, एक टैक्स होना चाहिए, स्पष्ट बोला और हमने पर्सनली चिदंबरम जी को अरुण जेटली जी के पास भेजा। हमने उन्हें भेजा था कि समझ-बूझ से लागू करिए, आप एक झटके से मत कीजिए क्योंकि बहुत बड़ा देश है एक झटके से करोगे, प्रॉब्लम आएगी। आपको मालूम नहीं कि सिस्टम कहाँ फेल करेगा? हमने एक गलती की, हमें ये बात नहीं समझ आई कि अगर कांग्रेस पार्टी उनको कोई सुझाव देगी, तो उसको बिल्कुल नहीं करेंगे और एक रात 12 बजे जीएसटी लागू कर दिया, पांच अलग-अलग टैक्स कर दिए और फ्रैंकली इन्फोर्मल सेक्टर्स, स्मॉल एंड मीडियम इंडस्ट्री को उन्होंने खत्म कर दिया।

आज डिमोनेटाइजेशन, नोटबंदी और जीएसटी के बाद जो बॉर्डर लाइन लोग थे, वो सब एक तरह से मर गए और वो जिंदा भी नहीं होंगे, बेचारे, उनके सब बिजनेसेज खत्म हो गए हैं। जो आपने इंफोर्मल सेक्टर की बात की, जो रीढ़ की हड्डी है, इंडिया की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है, उसको डेमेज किया। हम बड़े क्लियर हैं, हम सोचते हैं कि इस जीएसटी को बदले बिना काम नहीं चलेगा, वैरी क्लियर, ह्लद्धड्डह्ल  जैसे ही कांग्रेस पार्टी की सरकार दिल्ली में आएगी, त्रड्डड्ढड्ढड्डह्म् स्द्बठ्ठद्दद्ध ञ्जड्ड& (त्रस्ञ्ज) 2द्बद्यद्य ड्ढद्गष्शद्वद्ग त्रस्ञ्ज अब ॥श2 2द्बद्यद्य द्बह्ल ड्ढद्गष्शद्वद्ग त्रस्ञ्ज? कैसे करना है? बेसिकली तीन चीजें है, एक, आज 45त्न हिंदुस्तान की इकोनॉमी जीएसटी के अंदर नहीं आती वो एक प्रॉब्लम है। दूसरा प्रॉब्लम, जीएसटी का मतलब वन टैक्स, जीएसटी का मतलब फाइव टैक्स नही, तो हम वन टैक्स की और ट्रांजीशन करेंगे। हमारा लक्ष्य होगा कि हम आपको वन टैक्स, वन लेवल टैक्स दें और कम से कम। जो आम आदमी के नॉर्मल यूज की चीजें होती हैं, उनको हम जीएसटी से निकाल देंगे, ये हमारी स्ट्रेटजी होगी और ये जो आपको हर रोज 10-15 फॉर्म, ये पूरा मतलब कॉम्प्लिकेटेड सिस्टम है। 

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री गाँधी ने कहा कि आपने इंस्टीट्यूशन्स की बात की और आपने कहा कि हिंदुस्तान के सब इंस्टीट्यूशन्स पर आक्रमण हो रहा है, पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जजेज सार्वजनिक रुप से सामने आए, उन्होंने कहा कि उनको काम नहीं करने दिया जा रहा है। सीबीआई का आपने देखा, 2 बजे रात को डायरेक्टर को निकाल दिया। फ्रैंकली राफेल पर इंवेस्टीगेशन होने जा रहा था, मोदी जी ने कहा ठ्ठशह्ल ड्डष्ष्द्गश्चह्लड्डड्ढद्यद्ग, निकाल दिया। इलेक्शन कमीशन पर दवाब, प्लानिंग कमीशन का नेचर बदल दिया तो ये अटैक हो रहा है, अटैक क्यों हो रहा है, क्योंकि भाजपा के पास अपना एक बहुत रिजिड स्ट्रॉग संगठन आरएसएस है, और आरएसएस अपने लोगों को इन सब संगठनों में डाल रहा है, और एक प्रकार से हिंदुस्तान के इंस्टीट्यूशन्स को कैप्चर करने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस पार्टी के पास ऐसा कोई संगठन ही नहीं है हम अगर चाहें भी हम सुप्रीम कोर्ट को, सीबीआई को कैप्चर नहीं कर सकते क्योंकि हमारे संगठन का नेचर ही अलग है। गांधी जी ने एक राजनैतिक संगठन नहीं बनाया था, गांधी जी ने हिंदुस्तान की जनता का संगठन बनाया था। बहुत फर्क है। आरएसएस हिंदुस्तान की जनता का संगठन नहीं है। आरएसएस एक चुने हुए ग्रुप का संगठन है। कांग्रेस पार्टी आप सबकी है और हमारे में एक कमी है, फ्रैंकली जो मैं स्टेज से बोल रहा हूँ और 2014 का जो परिणाम रहा उसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि जिस प्रकार से हमें अपने दरवाजे आपके लिए खोलने चाहिए थे, हमने नहीं खोले, मगर ये जो हमारा संगठन है, ये आप सबका है, ये आपका है।

हमारी एक मीटिंग  हो रही थी एक बार और हमारे नेता ने, एक सीनियर नेता ने कहा ङ्खद्ग द्धड्ड1द्ग ह्लश ष्ड्डह्लष्द्ध ह्लद्धद्ग द्बद्वड्डद्दद्बठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठ शद्घ ह्लद्धद्ग 4शह्वह्लद्ध, ड्डठ्ठस्र ढ्ढ ह्यड्डद्बस्र ठ्ठश, ह्लद्धद्ग द्बद्वड्डद्दद्बठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठ शद्घ ह्लद्धद्ग 4शह्वह्लद्ध द्धड्डह्य ह्लश ष्ड्डश्चह्लह्वह्म्द्ग ह्लद्धद्ग ष्टशठ्ठद्दह्म्द्गह्यह्य क्कड्डह्म्ह्ल4. ढ्ढह्ल द्बह्य स्रद्बद्घद्घद्गह्म्द्गठ्ठह्ल. तो हमारा काम दरवाजे खोलने का है और हमारा काम आपकी आवाज को हमारे संगठन में लेने का है और हम इंस्टीट्यूशन्स को कैप्चर ही नहीं कर सकते। मैं फ्रैंकली बताऊँ, हम ट्राई भी करें, नहीं होता है। ये सब जो इंस्टीट्यूशन्स हैं, ये किसी एक व्यक्ति के नहीं है। ये हिंदुस्तान के हैं और इनकी रक्षा करने का काम पॉलिटिकल पार्टीज और पॉलिटिकल एस्टेब्लिशमैंट का है और दु:ख की बात है कि जो काम भाजपा को करना चाहिए, वो नहीं कर रहे हैं, वो इसका उल्टा कर रहे हैं, लेकिन आपने देखा होगा, रेजिस्टेंस आ रहा है, आरबीआई चीफ ने अपनी ओपिनियन रखी है, सीबीआई चीफ, जिनको मोदी जी ने बिठाया था, कांग्रेस पार्टी ने उनको वहाँ नहीं डाला था, नरेन्द्र मोदी ने पर्सनली सीबीआई चीफ को चुना है और वही व्यक्ति कह रहा है कि मैं अपने प्राइम मिनिस्टर की बात नहीं मानने वाला हूँ क्योंकि मेरा प्राइम मिनिस्टर हमारे इंस्टीट्यूशन पर आक्रमण कर रहा है, मैं अपने इंस्टीट्यूशन को डिफेंड करुँगा, तो ये हिंदुस्तान में इस समय हो रहा है मगर ये कैप्चर नहीं कर पाएंगे। हमारा काम आपके लिए जगह बनाने का है, आपकी जो विचारधारा है, सोच है उसको आगे लाने का है इसलिए मैं आपसे इस प्रकार से बात करता हूँ, मैं आपसे माफी माँगना चाहता हूँ कि बहुत सारे लोगों का बोलने का मूड था, बहुत सारे लोग चाहते थे कि वे भी बोलें। मैं अभी कंक्लूड करूँगा। मगर सबको चांस नहीं मिलता है तो इसके लिए मैं आपसे माफी माँगता हूँ। मैं आपको एक आखिरी बात कहना चाहता हूँ, कल रात को मैं थोड़ा सा इंदौर में घूमा, रेस्टोरेंट में गए और आपका जो शहर है उसको थोड़ा सा देखा। मैं चाहता हूँ, जैसे आप अगर यूएस में जाए या यूरोप में जाएं, किसी से पूछें, भईया, हिंदुस्तान के चार शहरों का, पांच शहरों का नाम लो, तो वो कहंगे, दिल्ली, बैंग्लोर, हैदराबाद, मैं चाहता हूँ कि कांग्रेस पार्टी का चीफ मिनिस्टर अगले पांच साल के अंदर उस लिस्ट में इंदौर का भी नाम डाल दे। वो काम करने के लिए आपको, हमको और आपको स्ट्रैटेजिकली इंदौर के बारे में सोचना पड़ेगा- इंदौर की क्या स्ट्रैंथ है? इंदौर को किन चीजों से जोड़ना है? इंदौर को किस प्रकार से दिखाना है? ये मैं करना चाहता हूँ। 

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