स्तन कैंसर के रोगियों के लिए विशेष वॉकाथन आयोजित किया

नई दिल्ली(श्रीजी एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)। मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने रविवार को 'निडर हमेशा  अभियान के तहत 5 किलोमीटर वॉकाथॉन  आयोजित किया। इस वॉकाथॉन में स्तन कैंसर से सफलता पूर्वक निजात पा चुकी 16 स्तन कैंसर रोगियों ने भाग लिया। वॉकाथॉन का नेतृत्व इन रोगियों का इलाज कर रहे डॉक्टर, डॉ. आर. रंगा राव ने किया, जिन्हें दौड़ने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। उन्होंने भी अन्य प्रतिभागियों के साथ इस वॉकाथॉन में हिस्सा लिया।सभी मरीजों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, और इस दौड़ को सुबह पश्चिम विहार के रैडिसन ब्लू से रवाना किया गया था। 'निडर हमेशा  का उद्देष्य स्तन कैंसर के रोगियों के जीवित रहने की दर में वृद्धि करने के लिए रोगी के परिवार से सहयोग हासिल करना है।मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के मेडिकल ओन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. आर. रंगा राव ने कहा, ''स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई लड़ना किसी महिला के लिए मानसिक रूप से काफी बड़ी चुनौती होती है, और यदि उसका परिवार इस लड़ाई में उसकी सहायता करता है और उसमें आत्मविश्वास पैदा करता है, तो वह सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ सकती है। वॉकाथॉन में भाग लेने वाली इन मरीज़ों ने समान कहानियां बताई। उनके परिवार ने स्तन कैंसर से लड़ने में उन्हें पर्याप्त सहयोग किया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। लोगों को यह पता होना चाहिए कि कैंसर विज्ञान में हाल में हुई प्रगति के कारण, अब स्तन कैंसर का पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है। स्तन कैंसर के उचित और प्रारंभिक चरणों में निदान कर न केवल रोगी के जीवित रहने की संभावनाओं को तीन गुना किया जा सकता है, बल्कि रोगी को बेहतर गुणवत्ता पूर्ण जीवन भी प्रदान किया जा सकता है। हम अपने अभियान निडर हमेशा के माध्यम से इस पर रोषनी डालना चाहते हैं।भारत में हर साल स्तन कैंसर के दर्ज होने वाले मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका श्रेय स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता को भी जाता है। ग्लोबैकन 2017 में प्रकाशित हाल के आंकड़ों के मुताबिक, स्तन कैंसर से पीड़ित भारतीय महिलाओं की संख्या दुनिया भर में सबसे अधिक है। लेकिन बढ़ती जागरूकता, समय पर इलाज और कैंसर देखभाल के क्षेत्र में बदलते प्रतिमानों ने धीरे-धीरे मृत्यु दर को कम कर दिया है।डॉ. राव ने कहा, ''निडर हमेशा  में भाग लेने वाली सभी मरीजों का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना है ताकि अधिकांश स्तन कैंसर का शुरुआती चरणों में ही पता लगाया जा सके, क्योंकि स्तन कैंसर वाली अधिकांश महिला मेटास्टेसिस के बाद अस्पताल आती हैं जब ट्यूमर शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है। इस चरण में, इसका पूरी तरह से इलाज नहीं हो पाता है लेकिन उपचार का उद्देश्य यहां तक कि स्तन हटाने की सर्जरी कर इसमें कमी करना (ट्यूमर के प्रसार को कम करना) होता है। ऐसे समय में परिवार से मिला आश्वासन सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्तन कैंसर वंशानुगत होने के अलावा, अब जीवन शैली की बीमारी अधिक है। तनाव, खान-पान की खराब आदतें, निश्क्रिय जीवनशैली, और वायु तथा जल प्रदूषण को युवा भारतीय महिलाओं के बीच स्तन कैंसर के मामलों को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। स्तन कैंसर होने की उम्र में तेजी से गिरावट आयी है। स्तन कैंसर पहले आम तौर पर 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को होता था लेकिन अब 40 साल से भी कम उम्र की महिलाएं भी इससे ग्रस्त हो रही हैं।

मैक्स अस्पताल स्तन कैंसर के इलाज के क्षेत्र में सालों से अग्रणी रहा है। 'निडर हमेशा लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाकर स्तन कैंसर के रोगियों को बेहतर गुणवत्ता पूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए अद्वितीय पहलों में से एक है। स्तन कैंसर का समय पर पता लगाने से पैल्पेबल घावों को मेटास्टैटिक चरणों में परिवर्तित होने से रोका जा सकता है और उस समय इसके इलाज के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं।

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