मोदी जी आज तक बदलाव तो नहीं, हमने बदला जरुर देखा है : कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। श्रीजी एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क

कांग्रेस मुख्यालय में ज्वलंत विषयों पर एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुझे याद है कि 2014 के चुनाव से पहले मोदी जी इतना जोरदार भाषण करते थे और इस बात को जरुर दोहराया करते थे कि हम बदलाव लाएंगे। बदलाव की राजनीति होगी और हर जगह बदलाव दिखेगा, तो मालूम नहीं कितना बदलाव हुआ है ये तो आप जानते हैं, ज्यादा जानते हैं। लेकिन 2014 से आज तक बदलाव तो नहीं, हमने बदला जरुर देखा है। बदलाव नहीं बदला, बदलाव नहीं भय, बदलाव नहीं छुप-छुप कर भ्रष्टाचार, बदलाव नहीं, भगवान राम के नाम पर राजनीति, हनुमान के नाम पर राजनीति। इस बदलाव का वायदा किया था मोदी जी ने?

 और देखो उत्तर प्रदेश में, बुलंदशहर में कैसा बदलाव लाए। उनके अपने ही एक मंत्री ओम प्रकाश राज भर साहब जो मंत्री हैं, खुद कहते हैं, खुद आरोप लगाते हैं कि बजरंग दल के लोग, वीएचपी के लोग, आरएसएस के लोग, उन्होंने एक सुनियोजित षड़यंत्र की और इस सुनियोजित षड़यंत्र का नतीजा ये हुआ की सुबोध कुमार सिंह की हत्या हुई। तो इसका मतलब ये हुआ कि अब उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मी और बजरंग दल, आरएसएस, वीएचपी उनकी टक्कर हो रही है। और ये क्यों हुआ? ये तो बात जानकारी के बाद पता चलेगी, लेकिन 400 लोगों का आना, पुलिस स्टेशन में घेराव करना, पत्थर से वार करना, चोट पहुँचाकर अगर दूसरे पुलिसकर्मी उनको ले जाना चाहते थे, उनके पास दो गाड़ियाँ थी एक को चला दिया उन्ही लोगों ने, यही बजरंग दल जिन पर आरोप लग रहा है।      

दूसरी गाड़ी में बैठे तो उस गाड़ी को घेर लिया, घेरने के बाद उन्हीं की पिस्तौल ले ली, तीनों मोबाईल ले लिए और डरा दिया और बाकी लोग भाग गए और उनकी हत्या कर दी। क्या ये है बदलाव? इस बदलाव की बात कर रहे थे, मोदी जी? और वहाँ योगी आदित्यनाथ जी, रमन सिंह के पास साथ बैठकर गोरखपुर में लाइट एंड साउंड शो देख रहे थे। निश्चित रुप से उस परिवार की दर्द भरी चीखें नहीं सुनना चाहते थे, उस पुलिसकर्मी के परिवार की, जिसकी हत्या हुई। उसको लाइटली ले रहे थे, मुझे याद है कि जब-जब पुलिस एनकाउंटर होता है तो योगी आदित्यनाथ जी तुरंत रिपोर्ट मंगवाते हैं और इस तरह से किसी की शहादत हो तो मौन हैं? अरे भाई, आपके प्रदेश के पुलिसकर्मी की हत्या हो रही है खुलेआम, वो लोग कर रहे हैं जो आप लोगों से जुड़े हुए हैं और आपके दिल में इतना भी दर्द नहीं कि मैं लाइट एंड साउंड शो रोक कर पता करुँ कौन है ये कैसे हो गया?

और ये मैं नहीं कहता, ये इंडियन एक्सप्रेस, जो लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन है, उत्तर प्रदेश में, कानून व्यवस्था जो उत्तर प्रदेश में है, वहाँ जांच की गई, इंडियन एक्सप्रेस ने जाँच की और कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में 2,351 शूट आउट्स हुई हैं । 2,351 शूट आउट्स, 63 लोगों की मृत्यु हुई है एनकाउंटर से, 24 जिलों में और ये 2017 से लेकर अगस्त, 2018 की बात कर रहा हूँ। इसी बीच इंडिया टुडे ने भी इसकी जाँच की और कहा कि सबसे ज्यादा आगरा जोन में एनकाउंटर हुए हैं, 241। 400 लोग जख्मी हुए हैं। तो कहने का मतलब यह है कि उत्तर प्रदेश में हो क्या रहा है और मोदी जी बतलाएं, जवाब दें इस बात का। क्या यही सपने दिखा रहे थे आप हिंदुस्तान की जनता को और यही योगी आदित्यनाथ जी वहाँ जाकर तेलंगाना में विष भरा भाषण देते हैं। राजस्थान में जाकर विष भरा भाषण देते हैं और इनकी ये हिम्मत देखिए, हम एमआईएम के खिलाफ हैं। राहुल गांधी जी ने कहा है कि एमआईएम भाजपा की 'सीÓ टीम है। वहाँ तेलंगाना में एमआईएम में केवल आठ कैंडिडेट् खड़े किए हैं और महाराष्ट्र में, जहाँ इनका कोई लेनदेन नहीं था, हर विधानसभा क्षेत्र में इन्होंने कैंडिडेट् खड़ा किया था, क्योंकि भाजपा का साथ देना चाहते थे और यहाँ भी भाजपा का साथ और टीआरएस का साथ देना है तो हम उनके खिलाफ हैं, लेकिन इस बात के भी हम खिलाफत करते हैं कि योगी आदित्यनाथ की इस लोकतंत्र में कैसे हिम्मत हुई ये कहने की कि अगर हम सत्ता में आए, वैसे तो तेलंगाना में कहीं सत्ता में आ ही नहीं सकते, लेकिन ये कहना कि अगर वे सत्ता में आए तो वे ओवैसी और उसके पार्टी के लोगों को, एमआईएम के लोगों को कहीं और भेज देंगे। ये किस किस्म की राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, हिंदुस्तान में?

ऐसा भय का वातावरण फैला हुआ है और उत्तर प्रदेश में खासतौर से, जो क्राईम्स अगेंस्ट वीमेन, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार हो रहा है, वो क्राईम रेट उत्तर प्रदेश में जब से योगी जी आए हैं, 24 प्रतिशत बढ़ा है, महिलाओं के खिलाफ। एक एप्पल एग्जिक्यूटिव को सितंबर में, लखनऊ में एक पुलिसकर्मी ने मार दिया। रोज के रोज एनकाउंटर होते हैं और एक ही पैटर्न में एनकाउंटर होते हैं, वो मोटर साईकिल से आते हैं, वो उसका पीछा करते हैं, मोटर साईकिल स्लिप हो जाता है, वो गिर जाते हैं, फिर वो अपना शूट आउट करते हैं, फिर उनको मार दिया जाता है।

अब अगर 40-50-60 एनकाउंटर का आप पैटर्न देखोगे, तो आपको पता चलेगा कि यही पैटर्न है। तो कानून की व्यवस्था उत्तर प्रदेश में नही जहाँ-जहाँ पर हम देखते हैं, भाजपा की सरकार है, यही हो रहा है। बड़े दु:ख की बात है और इस बात पर हमें दु:ख से कहना पड़ता है कि ये लोग शासन चलाने नहीं आए। ये जो हमारा लोकतंत्र है उसको काबू करने आए हैं, ताकी सब विरोधी दल खत्म हो जाए, विपक्ष राजनीति न कर पाए। रोज के रोज किसी न किसी के खिलाफ मुकदमा करते हैं।

अभी कल रात को तेलंगाना में हमारे वर्किंग प्रेसीडेंट को, रात को तीन बजे, रेवंत रेड्डी साहब को इन्होंने अरेस्ट कर लिया.... तीन बजे रात को, किस लिए? वजह ये नहीं बताई और जब अगले दिन वजह बताने की बात आई ये बात हमने इलेक्शन कमीशन में जाकर कही है, वजह की बात आई तो कहने लगे कि कम्यूनल वातावरण पैदा हो सकता था। तो कब तक चलेगा। वह इस बात पर हमारे मोदी जी कभी-कभी बात नहीं करते सवाल नहीं उठाते, उनको नेहरु जी बड़े याद आते हैं, कांग्रेस का इतिहास बड़ा याद आता है और मुझे मालूम है, हाल ही में उन्होंने मेरे ऊपर भी आरोप लगाया है कि हमने इंपीचमेंट इसलिए की, क्योंकि हम चाहते थे कि केस की सुनवाई न हो। अब उन्होंने इंपीचमेंट मोशन तो पढ़ा ही नहीं और अगर कल वो एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज का बयान पढ़ते तो उनको पता चलता कि असलियत क्या है।

जज साहब ने कहा है कुरियन जोसेफ साहब, जो रिटायर हो चुके हैं, उन्होंने कहा है कि हमें ऐसा लग रहा था कि जो पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया थे, उनको बाहर से कोई रिमोट कंट्रोल कर रहा था, मैं नहीं कह रहा ये, उस समय के जज कह रहे हैं। तो मोदी जी से मैं पूछना चाहता हूँ, आपको इसकी जानकारी है कि कौन रिमोट कंट्रोल कर रहा था? निश्चित रुप से कांग्रेस पार्टी का तो इसमें कोई योगदान नहीं हो सकता। तो कौन रिमोट कंट्रोल कर रहा था? और अगर आपको जानकारी है, तो देश की जनता को बताईए और अगर जानकारी नहीं है, तो जाँच करवाइए। क्योंकि ये बात तो सिद्ध हो गई कि हमारा जो इंपीचमेंट मोशन था, वो तथ्यों के आधार पर था, क्योंकि इसी जज ने कहा है कि कोई ऐसे चुनिंदा केस, जो सेंसिटिव केस थे, कुछ ही चुनिंदा जजों को भेजे जा रहे थे। ये मैं नहीं कह रहा, ये जज साहब ने कहा है और यही बात इंपीचमेंट मोशन में थी और यही बात मतलब, हमसे ही कह रहे थे और अगर रिमोट कंट्रोल सेंसिटिव केसेज की हो रही थी, तो कौन कर रहा था? और किसके पक्ष में हो रही थी? निश्चित रुप से वही रिमोट कंट्रोल कर रहा होगा न, जो अपना फायदा चाहता होगा।

फिर उन्होंने आरोप लगाया कि मैं नहीं चाहता था कि भाई, केस की सुनवाई हो। इनको यही नहीं मालूम कि दिसम्बर के बाद तो मैं कभी पेश ही नहीं हुआ, दिसम्बर, 2017 के बाद तो मैं कभी पेश ही नहीं हुआ और आज दिसम्बर, 2018 हो गया और कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट में चलती जा रही थी, मैं तो था ही नहीं वहाँ पर और जहाँ तक इंपीचमेंट मोशन का सवाल है वो तो इंपीचमेंट मोशन अप्रेल में हुआ। तो हमारे जो प्रधानमंत्री जी हैं, उनको आदत नहीं है दस्तावेज पढ़ने की। पढ़ते भी हैं तो ज्यादा गहराई से नहीं पढ़ते। और कभी-कभी समझते हैं बात को तो शायद गलत समझ जाते हैं। हो सकता है क्योंकि इतना वक्त नहीं है, क्योंकि हवाई जहाजों में ज्यादा रहते हैं, उनको कहीं ब्राजील जाना होता है, कहीं जापान जाना होता है, इधर-उधर जाना होता है तो बड़े व्यस्त रहते हैं न तो इतना वक्त नहीं होता उनके पास। मैं समझ सकता हूँ, क्योंकि फाईलों को भी क्लियर करना पड़ता है, राफेल को भी खरीदना पड़ता है, 36 राफेल को 'तुरंतÓ खरीदना पड़ता है। इनकी जो फॉरन पॉलिसी है, वो हिंदी में फौरन बोलते हैं न, हिंदी में फौरन शब्द है न, फौरन पॉलिसी है, तुरंत। तो तुरंत फैसले लेना। तो हम हमदर्दी रखते हैं, उनको पता नहीं लगता, कई बार तो ऐसी बात कह जाते हैं, जो इतिहास के खिलाफ हो, फैक्ट्स के खिलाफ हो, गोरखनाथ में इन्होंने कहा था, न आपको मालूम है, इन्होंने उत्तर प्रदेश में कहा था न कि गोरखनाथ जी तो अभी कल भी बोला न तो कभी गोरखनाथ, कबीर जी और गुरु नानक जी यहीं पर अपनी बातचीत करते थे, जबकि गोरखनाथ जी 11वीं सदी में और वो 14वीं और 15वीं सदी में हुए थे, लेकिन इनको जो है न, इंटर जेनरेशनल कम्यूनिकेशनल कि केवल मोदी जी को मालूम है किसी और को तो मालूम ही नहीं।

कमाल है, और आज कहते हैं कि भई, और हम विरोध करते हैं कि हम भारत माता कि जय नहीं होनी चाहिए। हम तो कहते हैं होनी चाहिए, साथ-साथ में मोदी जी की जय क्यों नहीं होनी चाहिए हर भाषण में, क्यों नहीं नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या की जय होनी चाहिए, नहीं तो भाषण अधूरा रह जाएगा।

 मैं समझता हूँ कि लोकतंत्र की हिफाजत करना केवल विपक्षी दलों का ही कर्तव्य नहीं है, आप लोगों का भी कर्तव्य है। जरा आप लोगों के कुछ ऐसे चैनल भी हैं जो मेनिफेस्टो को गलत तरीके से पेश करेंगे तो ऐसा लगता है कि कहीं लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। मेनिफेस्टो में कुछ लिखते हैं, अमित शाह कुछ और कहते हैं, और टीवी चैनल्स वहीं चलाते हैं, जो अमित शाह कहते हैं। ये आप में कहीं न कहीं, कभी न कभी, कोई न कोई तो पकड़ा जाएगा, क्योंकि देर हो सकती है, अंधेर नहीं हो सकता। इन्ही शब्दों के साथ आपका बहुत–बहुत धन्यवाद।

एक अन्य प्रश्न पर कि बुलंदशहर में किस प्रकार की इंक्वायरी कांग्रेस पार्टी चाहती है के उत्तर में श्री सिब्बल ने कहा कि भई देखो, ऐसा है कि आज का तो मुश्किल ये है कि किसका हम विश्वास करें, जो वहाँ की जो इंवेस्टिगेटिंग एजेंसीज हैं उन पर तो हम विश्वास कर नहीं सकते, क्योंकि जहाँ-जहाँ वो इंवेस्टिगेशन एजेंसीज हैं आजकल भी इंवेस्टिगेट कर रही हैं, तो जो बेचारा जो विक्टम है, जिसकी हत्या होती है, उसको एक्यूज्ड बना देते हैं, और जो हत्यारे हैं उनको बेल दिलवा देते हैं। तो उनके ऊपर तो हम विश्वास कर नहीं सकते तो वहाँ हम कभी-कभार कहते थे कि सीबीआई को सौंप दिया जाए, अब सीबीआई में क्या हो रहा है ये तो आप भी जानते हैं तो वो भी विश्वास उठ चुका है तो किस पर विश्वास करें? प्रधानमंत्री कोई और होता तो उन पर विश्वास करते। तो एक न्यायधीश अगर नियुक्त किया जाए, उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त किया जाए जो सिटिंग  न्यायाधीश हो तो उसकी देखरेख में इंक्वायरी हो तो हम समझ सकते हैं कि शायद कोई न्याय किसी को मिल सकता है।

एक अन्य प्रश्न पर कि मोदी जी किससे बदला ले रहे हैं के उत्तर में श्री सिब्बल ने कहा कि जहाँ-जहाँ भी उनको दिखता है कि भईया ये उभर कर आगे आ रहा है वहाँ बदला लेते हैं, वो आपको मालूम है, हर जगह, हर प्रांत में। उधर उत्तर प्रदेश में भी कुछ प्रयास हो रहे हैं, इसीलिए और हर जगह यही बात, आपको मालूम है, ज्यादा मालूम है। चंद्रबाबू नायडू साहब के साथ अभी आपको मालूम है, उनके एक। एक अन्य प्रश्न पर कि क्या कांग्रेस मायूस है के उत्तर में श्री सिब्बल ने कहा कि हम मायूस हैं! हम मायूस हैं! अभी जिस तरह से ये बौखला रहे हैं न, 11 तारीख को रिजल्ट देखना आप। उन पर मायूसी तो तब छाएगी, जब एक आंधी आएगी।

 

 

 

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