45299 लोग उपचारित हो चुके हैं जिससे हमारी रिकवरी दर 40.32 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है

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मीडिया के एक हिस्से में लॉकडाउन कार्यान्वयन और कोविड-19 प्रबंधन के प्रत्युत्तर के संबंध में सरकार के कुछ निर्णयों के बारे में कुछ रिपोर्ट हैं।
लॉकडाउन की अवधि का लाभप्रद रूप से उपयोग देश में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचों को मजबूत बनाने के लिए किया गया है। आज की तारीख तक, 45299 लोग उपचारित हो चुके हैं जिससे हमारी रिकवरी दर 40.32 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 21.05.2020 तक, 26,15920 सैंपलों का परीक्षण हो चुका है और 103532 नमूनों का परीक्षण पिछले 24 घंटों में 555 परीक्षण प्रयोगशालाओं ( सरकारी सेक्टर में 391 एवं 164 निजी प्रयोगशालाएं) के जरिये किया जा चुका है। नई दिल्ली स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित राज्य स्वास्थ्य विभागों तथा प्रमुख हितधारकों की सहायता से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के सहयोग से भारत भारतीय जनसंख्या में सार्स-कोव-2 की व्याप्ति का आकलन करने के लिए एक समुदाय आधारित सेरो-सर्वे का संचालन कर रहा है।
केंद्रीय एवं राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों से 650930 कोविड देखभाल केंद्रों के साथ साथ 3027 समर्पित कोविड अस्पतालों एवं कोविड स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, 2.81 लाख आइसोलेशन बेडों, 31,250 आईसीयू बेडों से अधिक तथा 11387 आक्सीजन समर्थित बेडों की पहले ही समर्पित कोविड अस्पतालों एवं कोविड स्वास्थ्य केंद्रों में पहचान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने राज्यों को 65 लाख पीपीई कवरआल तथा 101.07 लाख एन95 मास्कों की आपूर्ति की है। घरेलू उत्पादकों द्वारा अब प्रति दिन लगभग 3 लाख पीपीईकवरआलतथा 3 लाख एन95 मास्कों का विनिर्माण किया जा रहा है, हालांकि पहले देश में उनका उत्पादन नहीं होता था।
इसके अतिरिक्त, सरकार कोविड 19 से मुकाबला करने के लिए सभी स्तरों पर सक्रियतापूर्वक महामारीविद से परामर्श कर रही है और उन्हं साथ में जोड़ रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा कोविड 19 के लिए गठित राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) ने मार्च 2020 के मध्य से 20 बैठकें आयोजित की हैं और प्रणालीगत तथा प्रभावी तरीके से महामारी से निपटने में वैज्ञानिक तथा तकनीकी रूप से योगदान दिया है।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत एक स्वायत्तशासी संस्थान, जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने आईआईएससी, बंगलुरु के सहकर्मियों के साथ मिल कर कोविड 19 के लिए एक अन्वेषणात्मक भविष्यसूचक मॉडल का विकास किया है जो रोग के उद्भव एवं इसके परिणामस्वरूप, जिन चिकित्सा आवश्यकताओं की जरुरत पड़ती हैं, उनके बारे में अल्पकालिक पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के तहत देश के वैज्ञानिक समुदाय को सक्रिय बनाने के लिए एक सुसमन्वित दृष्टिकोण अपनाया गया है और वे 24 घंटे नए टेस्टिंग किट, प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, श्वसन उपकरणों का विकास करने के माध्यम से योगदान दे रहे हैं। इस दृष्टिकोण ने सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को साझा करने, उनके कार्य में सहयोग करने, आवश्यकता आधारित नवोन्मेषणों का विकास करने और अनुसंधान कार्यों के दुहराव से बचने के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में सहायता की है। डीएसटी एवं सहायक मंत्रालयों के तहत संस्थानों की सहायता से डीएसटी कोविड 19 से संबंधित कई मुद्वों का समाधान करने के लिए भारत में उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के मानचित्रण एवं उन्हें बढ़ावा देने में समन्वय करने में आगे बढ़ कर हिस्सा ले रहा है। डीबीटी एवं इसके पीएसयू, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टैंस काउंसिल (बीआईआरएसी) ने कोविड 19 के नियंत्रण के लिए नैदानिकी, टीकों, नोवेल थेराप्यूटिक्स, दवाओं की रिपर्पसिंग या अन्य किसी अंत:क्षेप में सहायता देने के लिए एक कोविड 19 रिसर्च कंसोर्टियम की घोषणा की है।
विभिन्न नीतिगत घोषणाएं, विशेष रूप से , ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ और ‘ आत्मनिर्भर भारत’ अभियान प्रवासी मजदूरों, स्ट्रीट वेंडरों, प्रवासी शहरी निर्धन, छोटे व्यापारियों , स्व रोजगार से जुड़े व्यक्ति, छोटे किसानों आदि के सामने आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए की गई हैं। केंद्र सरकार ने किफायती दर पर रहने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रवासी मजदूर एवं शहरी निर्धनों के लिए एक स्कीम की घोषणा की है। प्रवासी मजदूर, शहरी निर्धनों तथा छात्रों आदि को सामाजिक सुरक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण जीवनउपलब्धकराने के लिए किफायती रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स उपलब्ध कराये जाएंगे। यह शहरों में सरकार वित्तपोषित आवासों को छूटग्राहियों के माध्यम से पीपीपी मोड के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) में रूपांतरित करने, विनिर्माण इकाइयों, उद्योगों, संस्थानों, संगठनों को उनकी निजी भूमि पर अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) विकसित एवं प्रचालित करने, राज्य सरकार की एजेन्सियों/केंद्र सरकार के संगठनों को इसी तर्ज पर अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) विकसित एवं प्रचालित करने के लिए प्रोत्साहित करने के जरिये किया जाएगा।

post by tisha varshney

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