भारत रंग महोत्सव 2019 दिल्ली में समापन समारोह कल

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2019 यूथ फोरम का समापन समारोहर दि यूथ फोरम (बीआरएम 2019) का समापन समारोह 20 फरवरी, 2019 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस कैम्पस, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि सुश्री निरंजनी अय्यर, श्री अतुल कुमार, श्री सुधन्वा देशपांडे और सुश्री गीतांजलि कुलकर्णी होंगे।
नीचे 20वें भारत रंग महोत्सव (बीआरएम) के एक भाग के रूप में नाटकों, प्रदर्शनों और यूथ फोरम का संक्षिप्त वर्णन है।
माहौल या परिवेश के अनुकूल हो रहा अभिनय भारत रंग महोत्सव की दैनिक विशेषता है और यह थिएटर के महोत्सव में विभिन्न रंगों को जोड़ता है। इन प्रदर्शनों में विभिन्न राज्यों के कम-ज्ञात (जो लोकप्रिय नहीं है) स्थानीय, पारंपरिक और लोक कलाओं का वर्णन होता है जो इसे राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ता है। नाटक शुरू होने से पहले एनएसडी परिसर के भीतर और साथ ही सभागार में प्रदर्शित किया जाता है। आज के सशक्त प्रदर्शन में भवाई, मपेट, तंबूरा और कालबेलिया हैं।


भवाई राजस्थान की एक लोकप्रिय पारंपरिक नृत्य शैली है, जहां आदिवासी महिलाएं झूलते हुए क्षणों (कुंडा या कणा) के साथ नृत्य करती हैं, सिर पर मिट्टी के कलश को रखकर संतुलन बनाती हैं और सीसे पर यहां तक कि तलवार की धार वाले हिस्से पर खड़ी होती हैं। कालबेलिया नृत्य राजस्थान की घूमंतू जनजातीय संस्कृति का प्रमुख हिस्सा है। इसे श्स्नेक चार्मर डांसश् के नाम से भी जाना जाता है।
                                                              डायरेक्टर्स मीट
निर्देशक श्री गोविन्द सिंह यादव (शीशे के खिलौने- दि ग्लास मैनाजरी), सुश्री पूजा वेदविख्यात (रक्तबीज), श्री कंचन मलिक (एक दिन अलादीन), श्री रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता (पृथिबी रास्ता शब्दो) और सुश्री त्रिपुरारी शर्मा (माया मेघ) ने इस सत्र में भाग लिया। रंगमंच के आलोचक श्री मनोहर खुशलानी और श्री रवींद्र त्रिपाठी ने भी इस सत्र में भाग लिया और एक सूचनात्मक चर्चा की शुरूआत की। देश का नेता बनने की इच्छा रखने वाले राजनेता को नाटक में वास्तविक परिस्थितियों के अधीन रखा जाता है। मैंने अपने समाज की राजनीतिक स्थिति को उजागर करने की कोशिश की है। श्री कंचन मलिक ने ये कहा। मैं ऐसे नाटक करता हूं जिनसे मैं संबंधित हो सकता हूं। हम अक्सर अपने माता-पिता के बारे में शिकायत करते हैं और हर एक बात जिसे हम हर रोज करते हैं। और उन्हीं तत्वों को मैंने नाटक में शामिल किया है।श्श् गोविंद सिंह यादव ने ये कहा। मेरे लिए प्रेम और पहेली है। और निर्देशन के बारे में बात करते हुए, वास्तव में, हमारे नाटक में कोई निर्देशक नहीं है। हम एक टीम के रूप में एक साथ काम करते हैं और एक कहानी को आगे बढ़ाते हैं।श्श् श्री रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता ने ये कहा। यह अक्टूबर, 2017 का वक्त था जब हमने इस नाटक पर काम करना शुरू किया। गोंड कथा के माध्यम से, जिस पर नाटक आधारित है, हमने जीवन और मृत्यु के बीच की स्थिति को दिखाने की कोशिश की है।श्श् सुश्री त्रिपुरारी शर्मा ने ये कहा। इतिहास के प्रति मेरे आकर्षण और झुकाव ने मुझसे यह नाटक करवाया। यह एक प्रसिद्ध मराठी नाटक, इथे ओशालला का रूपांतरण है। हमने इस नाटक में ठेठ ऐतिहासिक शैली को अपनाने के बजाय अधिक यथार्थवादी तरीके से पेश करने की कोशिश की है।श्श् पूजा वेदविख्यात ने ये कहा।
                                                              नाटक
सुल्ताना डाकू (नौटंकी) लोक रंगमंच के रूप में देवेंद्र शर्मा द्वारा हिंदी में प्रस्तुत, यह दो बिल्लियों के साथ भविष्य की पृष्ठभूमि में खुलता है। तीन कुख्यात व्यापार टाइकून मास्टर लालची राज्य-मंत्री के राजनयिक समर्थन के माध्यम से श्अमूर्त सांस्कृतिक विरासतश् पर एकाधिकार करते हैं। किताबी कीड़ा, एक छद्म मानव-रोबोट, असहाय साधारण नागरिकों को ट्रैक करने के लिए निगरानी गैजेट डिजाइन करता है, जिसमें उनके पास लोरी गाने और खाना पकाने जैसे बुनियादी अधिकार नहीं होते हैं, जो अब लाल-सूचीबद्ध हो गए हैं। सार्वजनिक जीवन भूखे, अनिद्रा से ग्रस्त बच्चों और स्व-घोषित निर्वासन के रूप में एक असहाय राजा के साथ खतरे में है। अंततः बिल्लियां एक विशेष छोटी लड़की को पाकर बचाव के लिए आती हैं। (ओपन लॉन, 6रू00 बजे शाम) व्हेन वी डेड अवेकनरू शंकर वेंकटेश्वरन के अंग्रेजी नाटक में एक उम्रदराज मूर्तिकार के जीवन के कुछ अंतिम क्षण शामिल हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत खुशी की कीमत पर प्रसिद्धि हासिल की है। अपने बुढ़ापे में कलाकार ने अपनी प्रेरणा खो दी है, वह लक्ष्यहीन रूप से इधर-उधर भटकता है, उसने कला कृतियों का निर्माण करना बंद कर दिया है और उसकी युवा पत्नी के साथ उसका विवाह टूटने की कगार पर है। वह एक विक्षिप्त अजनबी महिला के पास आता है, जो मृत होने का दावा करती है। उन्हें पता चलता है कि वह विचित्र महिला कभी उनकी प्रसिद्ध कला के लिए उनको आदर्श और मॉडल माना करती थी। (श्री राम सेंटर, 4 बजे शाम)


नाइन माइल्स टू गो  जयश्री भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत बंगाली नाटक एक नाटककार के बारे में है जो बाघा जतिन पर एक नाटक लिखना चाहता है। वह केवल चार साथियों के साथ 500 ब्रिटिश सैनिकों के खिलाफ लड़ने के लिए बाघा जतिन की रणनीति को समझने की कोशिश कर रहा है। क्या बाघा जतिन सही था? लेखक ने बाघा जतिन की आत्मा के साथ बातचीत की, जो उनके सभी प्रश्नों का उत्तर देता है। वह बताते हैं कि कैसे भगवद् गीता और हमारे भारतीय दर्शन के अन्य पवित्र ग्रंथों ने सच्चे नेताओं को परिभाषित किया था। मेलोड्रामा (भावुकता) तब शुरू होता है जब नाटककार दृश्यों को याद दिलाता है, वह कल्पना करता है कि पांच महान सेनानियों ने लड़ाई जीत ली है। (एलटीजी, 5रू30 बजे शाम)

गौहररू द्विभाषी नाटक (अंग्रेजी और हिंदुस्तानी) लिलेट दुबे द्वारा प्रस्तुत अपने समय की एक शास्त्रीय सुपरस्टार गौहर जान की एक आकर्षक कहानी है। अपनी पीढ़ी की एक उग्र, सामंतवादी, स्वतंत्र मानसिकता वाली महिला है, वह पहली बार एक वैक्स रिकॉर्ड पर गाने वाली थी और जिसका निजी जीवन उसके पेशेवर के रूप को मंत्रमुग्ध करने वाला था। यह नाटक ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, 20वीं शताब्दी के मोड़ पर उस समय के शहरों जैसे इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ और कोलकाता की एक रोमांचक झलक प्रस्तुत करता है। (कमानी, 7.00 बजे रात)

हैश अर्नेस्टो टैग ग्वेवारारू शुभदीप राहा द्वारा किया गया अंग्रेजी और हिंदी नाटक दिल्ली की एक शिक्षक राजश्री और उनकी बहन पर आधारित है, जो एक ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी गेस्ट हाउस में रहने के लिए पहुंचते हैं। यह जगह गुरिल्ला का युद्ध क्षेत्र है। राजश्री गुरिल्लों की एक स्वघोषित राजनीतिक आदर्शवादी हैं। एलीबी एक शोधकर्ता है जो उस स्थान से पीएचडी कर रहा है। उसकी बहन सुधा बिना किसी विचारधारा के कॉलेज जाने वाली एक लड़की है, लेकिन वह तेजतर्रार और विद्रोही स्वभाव की है। उसे कहा जाता है कि वह गेस्ट-हाउस (अतिथिगृह) से बाहर न निकले। वह उसकी बहन को राजनीतिक विचारधारा के इर्द-गिर्द चर्चा में ले जाती है, उसके झुकाव पर सवाल करती है, राजश्री को उसके असली उद्देश्य को उजागर करने के लिए मजबूर करती है। वह एक मिशन पर तैनात एक गुप्त लेखक है जो कि एक गुरिल्ला नेता को बंदी बनाने के लिए पुलिस के मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर करने के लिए है। (अभिमंच, 8रू30 बजे रात)

लिविंग लीजेंड

बंगाली भारतीय अभिनेता, निर्देशक और सांस्कृतिक समीक्षक, श्री रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता ने 2रू00 बजे, सम्मुख में दर्शकों को संबोधित किया। वे पेशे से शिक्षाविद् रहे हैं। वह शैक्षिक पत्रिकाओं, प्रसारणों के लिए लिखते हैं और विभिन्न टेलीविजन कार्यक्रमों और वार्ताओं में भाग लेते हैं।

’कल होने वाले प्रदर्शनों की मुख्य बातेंरू

यहां कल होने वाले नाटकों के बारे में संक्षिप्त वर्णन दिया जा रहा है।

1. मीडियारा

लेखकरू हर भट्टाचार्य

निर्देशकरू गौतम मुखर्जी

समूहरू छंदम, पश्चिम बंगाल

भाषारू बंगाली

अवधिरू 1 घंटा 40 मिनट

2. हारुस मारुस

लेखकरू मुकेश शर्मा

निर्देशकरू रसिका अगाशे

समूहरू बीइंग एसोसिएशन, मुंबई

भाषारू हिंदी

अवधिरू 1 घंटा 35 मिनट

3. हिंद स्वराज

लेखक और निर्देशकरू अर्जुन देव चारण

समूहरू रम्मत, जोधपुर

भाषारू हिंदी

अवधिरू 1 घंटा 20 मिनट

4. प्राइवेसी

लेखकरू जेम्स ग्राहम

निर्देशकरू अजय कुमार खत्री

समूहरू एनएसडी डिप्लोमा प्रोडक्शन, नई दिल्ली

भाषारू हिंदी

अवधिरू 1 घंटा

यूथ फोरम

सुश्री निरंजन अइयर, श्री अतुल कुमार, श्री सुधन्वा देशपांडे और सुश्री गीतांजलि कुलकर्णी श्परफॉरमेंस मेकिंगश् पर अकादमिक बातचीत को संबोधित करेंगे। सत्र की अध्यक्षता एनएसडी के पूर्व छात्र सुश्री गार्गी भारद्वाज करेंगी और श्री गगन श्रीवास्तव इसके सूत्रधार होंगे।

’डॉयरेक्टर्स मीट

(स्थानरू योगा हॉल, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, समय 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक)

इस सत्र में शामिल होने वाले निर्देशकों के नामरू

1. निर्देशकरू सुश्री देवेंद्र शर्मा (सुल्ताना डाकू- नौटंकी)

2. निर्देशकरू सुश्री शंकर वेंकटेश्वरन (ह्वेन वी डेड अवेकेन)

3. निर्देशकरू सुश्री जयश्री भट्टाचार्य (नाइन माइल्स टू गो…)

4. निर्देशकरू श्री लिलेट दुबे (गौहर)

5. निर्देशकरू श्री सुभदीप राहा (हैश अर्नेस्टो टैग ग्वेवारा)

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