कई सेक्टरों में नीति के सरलीकरण की आवश्यकता : सीतारमण

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नई दिल्ली। श्रीजी एक्सप्रेस
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने आरंभिक संबोधन में कहा कि ढांचागत सुधार आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस का फोकस हैं। उन्होंने कहा कि कई सेक्टरों में नीति के सरलीकरण की आवश्यकता है, ताकि लोगों को यह समझने में आसानी हो सके कि कौन सा सेक्टर काम में लगा सकता है, विभिन्न गतिविधियों में भाग ले सकता है और पारदर्शिता ला सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि जब हम विकास के लिए सेक्टरों को खोल देते हैं, तो हम इन सेक्टरों को बढ़ावा दे सकते हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि व्यापक सुव्यवस्थित या प्रणालीगत सुधारों को लागू करने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रिकॉर्ड काफी दमदार है। वित्त मंत्री ने इस संबंध में कई उदाहरण दिए जैसे कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, जो लोगों के बैंक खातों में सीधे पैसा डालता है, जीएसटी, जिसने ‘एक राष्ट्र, एक बाजारÓ का सपना साकार किया; दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी), जिसने कई दिवाला मुद्दों को सुलझाया; और ‘कारोबार में सुगमताÓ, जो केंद्र सरकार के अनेक ठोस कदमों की बदौलत संभव हुई।
प्रेसवार्ता के दौरान सुश्री सीतारमण ने निवेश को गति देने के लिए नीतिगत सुधारों और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की आवश्यकता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह के माध्यम से तेजी से स्वीकृतियां दी जा रही हैं, वहीं निवेश परियोजनाओं को तैयार करने, निवेशकों और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के साथ समन्वय के लिए हर मंत्रालय में एक परियोजना विकास इकाई की स्थापना भी की जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने आत्म निर्भर भारत की दिशा में निवेश को गति देने के लिए निम्नलिखित नीतिगत सुधारों की घोषणा की है ।
सुश्री सीतारमण ने यह घोषणा भी की कि सामान्य आधारभूत ढांचा सुविधाओं और संपर्क बढ़ाने को औद्योगिक क्लस्टर उन्नयन के लिए चैलेंज मोड के माध्यम से राज्यों में एक योजना का कार्यान्वयन किया जाएगा। नए निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए औद्योगिक भूमि/ लैंड बैंक की उपलब्धता और जीआईएस मैपिंग के साथ औद्योगिक सूचना प्रणाली (आईआईएस) पर सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आईआईएस पर पांच लाख हेक्टेयर में 3376 औद्योगिक पार्क/ एस्टेट/ एसईजेड का चिह्नांकन किया गया है। 2020-21 के दौरान सभी औद्योगिक पार्कों को सूचीबद्ध किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने आज आठ क्षेत्रों कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, नागरिक उड्डयन, बिजली क्षेत्र, सामाजिक आधारभूत ढांचा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में निम्नलिखित ढांचागत सुधारों की घोषणा की।
कोयला क्षेत्र
1. कोयला क्षेत्र में वाणिज्यिक खनन की पेशकश
सरकार कोयला क्षेत्र में इन उपायों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देगी
क. निश्चित रुपये/टन की व्यवस्था के बजाय राजस्व साझेदारी व्यवस्था लागू होगी। इसमें कोई भी पक्ष कोयला ब्लॉक के लिए बोली लगा सकता है और खुले बाजार में बिक्री कर सकता है।
ख. प्रवेश नियमों को लचीला बनाया जाएगा। तत्काल लगभग 50 ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी। पात्रता की कोई शर्त नहीं होगी, एक सीमा के साथ अग्रिम भुगतान किया जाएगा।
ग. पूरी तरह अन्वेषित, कोयला ब्लॉकों की नीलामी के पिछले प्रावधान की तुलना
बी) 2023-24 तक एकबिलियन टन कोयला उत्पादन के कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के संवर्धित लक्ष्?य को पूरा करने और निजी ब्?लॉकों से कोयला उत्?पादन के लिए 50,000 करोड़ रुपये का अवसंरचना विकास किया जाएगा। इसमें खदानों से रेलवे साइडिंग तक कोयले के मशीनीकृत हस्तांतरण (कन्वेयर बेल्ट) में 18,000 करोड़ रुपये मूल्?य का निवेश शामिल होगा। यह उपाय पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मदद करेगा।

post by saurabh varshney

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