”टीबी हारेगा, देश जीतेगा के नारे के साथ आयोजित होंगे कार्यक्रम : डॉ नरेंद्र सैनी

0
170

नई दिल्ली (श्रीजी एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए) विश्व टीबी डे 2019 के मौके पर लोगों को टीबी के बारे में जागरूक बनाने के उद्देश्य से जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम टीबी के उन्मूलन के लिए किए जाने वाले जरूरी उपायों तथा इन उपायों के बारे में जागरूकता कायम करने के लिए आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देष्य इस भयावह बीमारी के बारे में आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा सन 2025 तक इस बीमारी के प्रकोप तथा इसके कारण होने वाली असामयिक मृत्यु एवं विकलांगता को खत्म करना है।
इन कार्यक्रमों के लिए आईएमए ने नारा दिया है – आईएमए का नारा, टीबी से छुटकारा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शांतनु सेन के द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ होगा। इसके बाद विश्व टीबी डे की 137 वीं वर्शगाठ के प्रतीक के तौर पर 137 गुब्बारे उड़ाए जाएंगे। विष्व टीबी डे का आयोजन उस दिन किया जाता है जब सर रॉबर्ट कोच ने बेसिलस का पता लगाया था।
जन जागरूकता का यह कार्यक्रम पूरे भारत में आईएमए की सभी 750 शाखाओं की ओर से आयोजित किया जाएगा। लोगों को ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से टीबी के बारे में जागरूक बनाने से देश में टीबी के उन्मूलन का मार्ग प्रषस्त होगा। इन कार्यक्रमों के मुख्य आकर्शणों में टीबी पर आधारित नुक्कड नाटक का आयोजन षामिल है। इसके अलावा प्रषिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। इसमें कई स्वयंसेवी संस्थाएं हिस्सा लेंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र, एनजीओ कार्यकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी भाग लेंगे। आईएमए के मानद वित्त सचिव डॉ. रमेश दत्ता ने इस सिलसिले में बताया, ”विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से उपलब्ध कराए गए हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत औषधि संवेदी (ड्रग सेंसेटिव) एवं बहु औषधि प्रतिरोधी (मल्टी ड्रग रजिसटेंस) तपेदिक के मामले में आगे है। तपेदिक से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा महिलाओं में टीबी को लेकर लापरवाही है। अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं में टीबी के मामलों की अनदेखी होती है। हमारे देश में 32 लाख महिलाएं टीबी से पीड़ित हैं। यही नहीं इन महिलाओं में मृत्यु दर भी अधिक है। इस बीमारी के प्रबंध में आने वाली बाधाओं को कारगर तरीके से दूर करने तथा टीबी के मामलों को सामने लाने के लिए हमें आगे आने तथा एकजुट होकर रणनीतियां बनाने की जरूरत है।
टीबी के उन्मूलन के लिए न केवल प्राइवेट चिकित्सकों को शामिल करना जरूरी है बल्कि लोगों में जागरूकता कायम करना भी आवष्यक है ताकि टीबी के मामलों को सामने लाया जा सके क्योंकि टीबी के खिलाफ जंग में टीबी के मरीज की पहचान एवं इलाज जरूरी है। भारत में गुप्त टीबी के मरीजों की संख्या भी काफी अधिक – 40 प्रतिषत से अधिक है। ऐसी स्थिति में सरकार टीबी के मरीजों के इलाज को प्राथमिकता दे रही है।
आईएमए के पूर्व मानद महासचिव डॉ. नरेन्द्र सैनी ने कहा, ”गत वर्श टीबी से मरने वाले रोगियों के प्रतिषत में तीन प्रतिशत की गिरावट हुई थी। आईएमए सन 2025 तक टीबी के मामलों में 80 प्रतिशत तक की कमी लाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे देष में हर साल टीबी के मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण गुप्त टीबी है। हालांकि रोग के प्रकट होने पर रोग के लक्षण गंभीर होते हैं और ऐसे में छ: से नौ माह तक एंटीमाइक्रोबायल दवाइयों से मरीजों का इलाज होना जरूरी है। भारत सरकार की ओर से किए जाने वाले कार्यक्रमों के परिणामों को अधिकतम करने के लिए आईएमए अपनी तरफ से प्रयास कर रहा है। पिछले छह महीनों से पूरे भारत में आईएमए की ओर से सीएमई और जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है और इनसे साकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here