दिल्ली २३ फरवरी २६ (आईडब्ल्युएनए)। भारतीय नौसेना पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आठ युद्धपोतों वाली एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) परियोजना के तीसरे पोत अंजदीप को शामिल करने जा रही है। इस युद्धपोत को 27 फरवरी, 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।
इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी करेंगे।
इस शुभारंभ समारोह से रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारतÓ की दिशा में राष्ट्र की तीव्र प्रगति का पता चलता है, क्योंकि एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट परियोजना स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित, अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है – यानी तटीय और उथले जल क्षेत्र जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह पोत ‘डॉल्फिन हंटरÓ के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है, जिसमें हल माउंटेड सोनार अभय भी शामिल है, और हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है। अपनी प्राथमिक पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा, यह फुर्तीला और अत्यधिक पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम युद्धपोत तटीय निगरानी, ??कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (एलआईएमओ) और खोज एवं बचाव अभियान चलाने में भी सक्षम है। 77 मीटर लंबे इस पोत में एक उच्च गति वाला वाटर-जेट प्रोपल्सन प्रणाली है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
कारवार तट से दूर स्थित ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप के नाम पर नामित अंजदीप नामक पोत को नौसेना में शामिल करने से तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र सहित देश के विशाल समुद्री हितों और तटीय क्षेत्रों की रक्षा करने की नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो भारतीय नौसेना को एक दुर्जेय ‘निर्माता नौसेनाÓ में बदलने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
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लोकायन-26 के दौरान मिस्र के सफागा बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शनी ने ऐतिहासिक आगमन किया
दिल्ली २३ फरवरी २६ (आईडब्ल्युएनए)। भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शनी 21 फरवरी, 2026 को अपने चल रहे लोकयान-26 अभियान के हिस्से के रुप में मिस्र के सफागा पहुंचा। 16 दिनों में 1,832 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए, सलालाह से सफागा तक का यह सफर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो पोत के चालक दल के लचीलेपन, आत्मविश्वास और सहनशक्ति को दर्शाता है।
पोत के आगमन पर मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया जो बेहतर नौसैनिक सहयोग और अंतर-संचालनीयता के साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। भारतीय नौसेना, बंदरगाह पर ठहरने के दौरान मिस्र के नौसैनिकों के साथ पेशेवर बातचीत करेगी, नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगी और द्विपक्षीय सद्भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सामुदायिक संपर्क गतिविधियों का संचालन करेगी।
अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना एक महत्वपूर्ण परिचालन चरण था, क्योंकि पोत ने चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थितियों और भारी समुद्री यातायात के बीच से सफलतापूर्वक यात्रा की, जो उच्च स्तर की व्यावसायिक दक्षता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन करती है। सफागा में आईएनएस सुदर्शनी की यात्रा ‘मैत्री के सेतुÓ पहल के तहत समुद्री संपर्क के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत और मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।